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दो से अधिक बच्चे होने पर नहीं लड़ पाएंगे बिहार पंचायत चुनाव! जानें पंचायती राज मंत्री ने क्या कहा

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  पटना: बिहार में अगले साल पंचायत चुनाव होना है. पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.  तैयारियां के बीच ये खबर सामने आ रही है कि वैसे लोग जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, वो पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. इस खबर के सामने आने के बाद से चुनाव लड़ने की मंशा रखने वाले लोगों के बीच संशय बना हुआ है.  बिहार में पहले से है ये नियम  ऐसे में खबर की सच्चाई जानने के लिए एबीपी न्यूज ने बिहार के पंचायती राज मंत्री से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार के परिवेश में जो जनसंख्या नियंत्रण कानून की बात है, 2006-07 के बाद जो कानून बनाए गए, उसमें नगर निकाय में ये प्रावधान किया गया कि जिनके दो से अधिक बच्चे होंगे, वो चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.  उन्होंने कहा, " बिहार में पहले से ये कानून है. इसे पंचायती राज में लागू करने की आवश्यकता है. लेकिन अब अगर लागू भी कर दिया गया तो उसके लिए 2026 तक का इंतजार करना पड़ेगा. इस परिवेश में मेरा खुद के मानना है कि अब हिंदुस्तान में इस पर ज्यादा चर्चा की जरूरत है. जरूरत पड़ने पर इसको कानून भी बनाना चाहिए." मंत्री ने कहा, " बि...

अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव में सभी आरक्षित पदों में होगा बदलाव

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2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद 2026 में होगा त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव संपादक: पटना विधानसभा चुनाव 2025 के बाद अगले वर्ष 2026 में त्रिस्तरीय पंचायत का चुनाव कराया जाएगा। आगामी पंचायत चुनाव में सभी आरक्षित सीटों के लिए नए सिरे से आरक्षण की प्रक्रिया की जाएगी। पिछले पंचायत आम चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत आरक्षण को लागू किया गया था। अब वहीं पर आरक्षण का चक्र बदल जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव में सीटों का आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के आधार पर तय किया जाएगा। जनगणना के आधार पर नए सिरे से मिलेगा लाभ पिछले 2021 में पद आरक्षित थे, उसे समाप्त कर जनगणना के आधार पर नए सिरे से आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों का आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के अनुपात में दिया जाता है। अगर किसी निर्धारण क्षेत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों की आबादी 25 प्रतिशत है, तो उस क्षेत्र के पदों का आरक्षण भी 25 प्रतिशत होगा। इसी प्रकार अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशियो...

विवाह पंचमी: एक विशेष पर्व

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विवाह पंचमी का पर्व हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन माना जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह का स्मरण कराता है। विवाह पंचमी हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक कथा वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों के अनुसार, राजा जनक ने शिवधनुष को एक सभा में उपस्थित किया और यह घोषणा की कि जो भी वीर इस धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता का वर बनेगा। कई राजाओं और वीरों ने प्रयास किया, लेकिन केवल भगवान श्रीराम ने इसे उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई। इसके बाद, श्रीराम और सीता का विवाह संपन्न हुआ, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। विवाह पंचमी का महत्व धार्मिक आस्था: यह दिन धर्म, पवित्रता और कर्तव्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वैवाहिक जीवन के लिए शुभ: यह दिन दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य के महत्व को दर्शाता है। भक्ति और पूजा: इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा विशेष रूप से की जाती है। भक्त रामचरितमानस का पाठ करते हैं और कीर्तन-भजन का आयोजन होता है। मनाने की विधि पूजा-पाठ: भक्त सुबह स्नान कर श्रीराम और...

भारतीय संविधान दिवस पर विशेष लेख परिचय

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भारत का संविधान, जो दुनिया के सबसे लंबे लिखित संविधान के रूप में जाना जाता है, भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। यह हमारे देश के नागरिकों को अधिकार, कर्तव्य, और स्वतंत्रता प्रदान करता है और हमारे शासन के सिद्धांतों और संस्थाओं का मार्गदर्शन करता है। भारतीय संविधान के अंगीकरण की प्रक्रिया 26 नवम्बर 1949 को पूरी हुई थी, और इसे 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया था। भारतीय संविधान के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 26 नवम्बर को संविधान दिवस (सम्विधान दिवस) मनाया जाता है। संविधान दिवस का महत्व संविधान दिवस, भारतीय संविधान के अंगीकरण की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारतीय संविधान के महत्व और उसकी उद्देश्यों को समझने का अवसर प्रदान करता है। भारतीय संविधान ने न केवल भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया, बल्कि यह हमारे समाज में समानता, न्याय, और स्वतंत्रता की अवधारणा को भी सुनिश्चित करता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता' का अधिकार हर नागरिक को मिलता है, जो हमारे मौलिक अधिकारों का आधार है। संविधान का निर्माण और डॉ. भी...

रिंकू कुमारी तिरहुत स्नातक उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में

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तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आगामी उप चुनाव के लिए सियासी माहौल गरमाने लगा है। इस चुनावी मुकाबले में रिंकू कुमारी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है। रिंकू कुमारी ने क्षेत्र के विकास, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर जोर देने का संकल्प लिया है। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरना एक चुनौतीपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन रिंकू कुमारी ने इसे अवसर के रूप में लिया है। उन्होंने कहा, "मैं इस चुनाव में जनता के बीच अपनी आवाज उठाने आई हूं। मेरी प्राथमिकता क्षेत्र के छात्रों, युवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए काम करना होगी।" रिंकू कुमारी ने आगे कहा कि उन्हें इस चुनाव में किसी पार्टी का समर्थन नहीं है, लेकिन उनकी योजना क्षेत्र के मुद्दों पर जनता के साथ मिलकर काम करने की है। उनका मानना है कि क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जा सकता है। रिंकू कुमारी का यह कदम तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एक नई राजनीतिक दिशा की ओर संकेत करता है, जहां एक निर्दलीय उम्मीदवार अपनी क्षमता और निष्ठा के आधार पर चुनावी जंग लड़ेंगे। अब य...

भूषण महतो तिरहुत स्नातक उप चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में

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तिरहुत, बिहार: तिरहुत स्नातक विधान परिषद उप चुनाव में अब एक नया मोड़ आया है। भूषण महतो, जो इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाग ले रहे हैं, ने अपनी उम्मीदवारी का ऐलान किया है। भूषण महतो, स्थानीय समुदाय के बीच एक पहचान बना चुके हैं, और अब वह स्नातक क्षेत्र के चुनावी समर में उतरे हैं। भूषण महतो का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय क्षेत्र के विकास और स्नातक समुदाय की असली समस्याओं को हल करने के लिए लिया है। महतो का कहना है, "मुझे विश्वास है कि मैं निर्दलीय रूप से चुनाव जीतकर तिरहुत क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और स्थानीय समस्याओं का समाधान कर सकता हूँ।" यह उप चुनाव तिरहुत स्नातक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें स्नातक वर्ग के वोटर्स का सीधा असर होता है, जो स्थानीय विकास की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। महतो के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को क्षेत्र के हर वर्ग की आवाज़ के रूप में पेश किया है और वह छात्रों, शिक्षकों, और अन्य समाजिक वर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करेंगे। भूषण महतो की उम्मीदवारी से तिरहुत स्नातक उप चुनाव में क...

संजना भारती तिरहुत स्नातक उप चुनाव की निर्दलीय प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरीं

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तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उप चुनाव में इस बार एक नई और दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है। संजना भारती, जो एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनावी रण में उतरने जा रही हैं, अपने समर्थकों और क्षेत्र के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। संजना भारती ने अपनी चुनावी यात्रा की शुरुआत करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य तिरहुत क्षेत्र के स्नातक समुदाय के लिए शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक न्याय के मुद्दों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने यह भी बताया कि वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि वह न तो किसी राजनीतिक पार्टी से बंधी हैं और न ही किसी विचारधारा से, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता देना है। प्रमुख मुद्दे: संजना का कहना है कि वह तिरहुत क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, और स्थानीय लोगों की आवाज को उचित मंच देने के लिए काम करेंगी। उनके अनुसार, स्नातक छात्रों के लिए नए अवसरों का सृजन और उनके लिए बेहतर योजनाओं का निर्माण किया जाएगा ताकि वे अपने जीवन को बेहतर बना सकें। समर्थन और प्रतिक्रियाएँ: संजना भारती क...