परिहार उत्तरी में पूर्व मुखिया की तीनों बहुएं हारी चुनाव

परिहार सीतामढ़ी संवाद सहयोगी - किसी ने क्या खूब कहा है कि दो के झगड़े में तीसरे को लाभ मिल जाता है। यह वाकया परिहार उत्तरी पंचायत की निवर्तमान मुखिया इशरत खातून पर एकदम सटीक बैठती है। इशरत की सास खैरून खातून वर्ष 2011 में मुखिया पद पर चुनाव जीती। इस बार खैरून खातून की तीन बहुएं मुखिया पद के लिए चुनाव मैदान में थी। लेकिन विडंबना देखिए कि तीनों की तीनों चुनाव हार गई। यहां कई बार से भाग्य आजमा रही संजू चौरसिया चुनाव जीत ली है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 से 16 तक खैरून मुखिया रही। 2016 के चुनाव में खैरून के पुत्र नजामुद्दीन ने मां की जगह अपनी पत्नी इशरत को कैंडिडेट बनाया। इशरत भी चुनाव जीत गई। वर्ष 2021 का चुनाव आते-आते भाइयों एवं पिता में मतभेद हो गया। नतीजा यह हुआ कि निवर्तमान मुखिया इशरत तो चुनाव लड़ी ही, निजामुद्दीन का भाई अनीसुल ने अपनी पत्नी नाहीद परवीन को भी प्रत्याशी बना दिया। यहां बता दें कि खैरून खातून को चुनाव में मोतियों की माला चुनाव चिन्ह मिला था। वर्ष 2016 के चुनाव में इशरत को भी मोतियों की माला चुनाव चिन्ह मिली। अनीसुल ने पत्नी को केवल प्रत्याशी बनाकर नहीं माना। इशरत को मोतियों की माला छाप ना मिले इसलिए उसने अपने एक और भाई की पत्नी अजमेरी को भी प्रत्याशी बना दिया। इस प्रकार अजमेरी को मोतियों की माला चुनाव चिन्ह मिल गया। हालांकि वह अपनी पत्नी के लिए ही वोट मांगता रहा। लेकिन आखिरकार परिणाम यह हुआ कि तीनों चुनाव हार गईं और यहां से संजू चौरसिया ने बाजी मार ली।

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